Sunday, 9 July 2017

मिट्टी के मोल

कुकर की दाल और मिटटी की हांड़ी की दाल ... 

हम लोग खाना इसलिए खाते है ताकि हमारे शरीर को जरुरी प्रमाण में पोषक तत्त्व मिले। जो भोजन हम खाते हैं उसमे अपने आप में तो मिनरल्स विटामिन्स प्रोटीन तो होते ही हैं, इनके ये गुण बढ़ाने या घटाने में इनको पकाने वाले बर्तन भी विशेष स्थान रखते हैं। आइये जानते हैं मिटटी और दूसरे बर्तन में बनाया हुआ भोजन किस प्रकार प्रभावी और दुष्प्रभावी होता हैं।

अगर आप लोग एलुमिनियम के प्रेसर कूकर में खाना बनाते हो तो 87% पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते है, सिर्फ 13% ही बचते है। ये पोषक तत्व तो कम करता ही हैं साथ में एल्युमीनियम खाने के माध्यम से हमारे शरीर में धीरे धीरे पहुँचता रहता हैं और फिर ये शरीर से निकल भी नहीं पाता, और धीरे धीरे हम शारीरिक और मानसिक अपंगता की और बढ़ते हैं। मतलब एल्युमीनियम के बर्तन में खाना बनाना ज़हर हैं। और यही हाल स्टील के बर्तन के साथ होता हैं। इसलिए स्टील और एल्युमीनियम दोनों ज़हर हैं।

बर्तनो में पाये जाने वाले पोषक तत्व।

अगर पीतल के बरतन में बनाये तो 7% पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते है, 93% बचते है।
“अगर कासे के बरतन में बनाये तो 3% पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते है, 97% बचते है।”
अगर आप मिटटी के बरतन में खाना बनाये तो 100% पोषक तत्त्व बचते है। और इसके साथ मिटटी के अपने गुण और पोषक तत्व भी इसमें समा जाते हैं। जिस से भोजन में मौजूद गुण कई गुना बढ़ जाते हैं।

और अगर आपने एक बार मिटटी के बरतन का खाना खा लिया तो उसका जो स्वाद है वो आप जिन्दगी भर नहीं भुलेंगे।

         तो आप सब जान गए होंगे कि मिट्टी के बर्तन ही हमारे लिए खाना पकाने के लिए सवोप्रिय है
               जिससे हमारे शरीर को नुकसान नहीं होता है l
               शायद इसी वजह से हमारे पूर्वज हमशे ज्यादा ताकतवर और दीर्घाआयु तथा रोगमुक्त थे l
                           जय किसान, जय कुम्हार
                            जय जवान, जय भारत माता

Thursday, 20 October 2016

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली 

इस दीपावली आप सबों को हार्दिक शुभ कामनाए।  दीपावली में जितना हो सके स्वदेशी वस्तु  का उपयोग करे विदेशी वस्तु  जैसे चिनी  लाइटे लक्मी गणेश  की मूर्ती  बिलकुल न खरीदे दीपावली में मिटटी के दिये का प्रयोग करे। दीपावली के दिन भगवान  राम रावण  पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे  थे  और लक्मी  गणेश की पूजा धन्य धान्य  शांति एवं धर्म की स्थापना  के लिया की थी। 
भगवान राम के अयोध्या लौटने की ख़ुशी में सरे अयोध्या वासियो ने इस दिन दिप प्रज्वलित कर हर्ष उल्लास व्यक्त की थी। 
लेकिन हमारी आस्था  पर करोड़ो रूपये विदशो में जा रहा है तो राम राज्य कहा से स्थापित होगी अगर राम राज्य की कामना है तो पूर्णता स्वदेशी वस्तुओ पर जितना हो सके निर्भर रहे यह प्रयत्न करे। हमारे कुम्हारो को दयनीय दशा को देखते हुए अपने नजदीक के कुम्हार से ही दिप दिए  खरीदार कर आपका यह प्रयास हमारे भाई बंधू  के घर में उजाला करेगा और यह देख मन को तृप्ति मिलेगी।
जितना हो सके स्वदेशी वस्तु कही उपयोग करे चीन की ही नहीं बल्कि सभी विदेशी वस्तुओ का धीरे धीरे बहिस्कार करना प्रारम्भ  
जय हिन्द     जय भारत।